जीवन हंसने-हंसाने का अवसर है। आदमी खुद पर हंस नहीं सकता, क्योंकि वह मूर्ख बनने से डरता है। लेकिन मूर्खता में क्या खराबी है? ज्ञानी बनने की बजाय मूर्ख बनकर जीना ज्यादा बेहतर है। सच्चा मूर्ख वह है जो किसी बात को गंभीरता से नहीं लेता। मूर्ख आदमी अकारण हंसता रहता है। उसमें मिथ्या अहंकार नहीं होता। वह सहज, सरल होता है। यह बहुत बड़ा वरदान है। क्योंकि हमारी जिंदगी इतनी बोझिल है कि हंसने के कारण खोजने जाएं तो मिलने बहुत मुश्किल हैं। जो अकारण हंस सकता है उसका जीवन मधुमास बन जाता है; उसके जीवन में आनंद की फुलझड़ियाँ छूटती हैं। अकारण ही।
दुकानदार-नहीं साहब मैंने आपको अच्छी क्वालिटी का रेडियो दिया है।
रोहन-इसपे लिखा है मेड इन जापान लेकिन चालू करो तो बोलता है ऑल इंडिया रेडियो।
2. मोहन की मां की तबियत खराब हो गई। वह अपनी मां को लेकर अस्पताल गया।
डॉक्टर ने कहा, "इनके कुछ टेस्ट होंगे।"
मोहन-हे भगवान, अब क्या होगा "मेरी मां तो अनपढ है।"
3. पति-क्यों न आज की चाय बाहर चलकर पी जाए।
पत्नी-क्यों? तुम्हें क्या लगता है कि मैं चाय बनाते-बनाते थक गई हूं?
पति-अरे नहीं, दरअसल मैं ही कप प्लेट धोते-धोते तंग आ गया हूं।
4. पत्नी (पति से)-मेरे पिताजी जब गाते थे तो उड़ते हुए पंछी गिर जाया करते थे।
पति (पत्नी से)-क्या तुम्हारे पिताजी मुंह में कारतूस भर कर गाते थे।
5. पत्नी (पति से)-इतनी देर हो गई, आखिर क्या ढूंढ रहे हो?
पति (पत्नी से)-कुछ भी नहीं।
पत्नी (पति से)-कुछ तो जरूर खोया है! चार घंटे से मैरिज सर्टिफिकेट को उलट-पलट रहे हो।
पति (पत्नी से)-देख रहा हूं कि इसकी एक्सपायरी डेट कहां है?
6. पप्पू-अपनी शादी वाले दिन बहुत उदास था!
राकेश-क्या बात है? आप उदास क्यों हो?
पप्पू-मेरे ससुराल वालों ने बारात में कम लोगो को लाने के लिये कहा है! पता नहीं मुझे लेकर जाएँगे भी या नहीं।
7. सुरेश-बारिश बहुत तेज है, तूफान भी चल रहा है! आप घर जाने का विचार छोड़ दीजिए यहीं सो जाइए!
राजेश-आप कहते हो तो मैं यहीं सो जाता हूँ पर मैं घर से अपना नाइट सूट तो ले आऊं।
8. चुन्नू-धरती और चाँद का क्या रिश्ता है?
मुन्नू-बहन और भाई का!
चुन्नू-वो कैसे?
मुन्नू-हम धरती को धरती माता कहते हैं और चाँद को चंदा मामा।
"नृत्य में डूबो, उत्सव मनाओ, गीत गाओ- यही धर्म है।"
Excellent
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