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  • एक दिन ढब्बूजी केक खरीदने के लिए बाजार गए। मुश्किल से उन्होंने एक केक पसंद किया। बेकरी का कर्मचारी बोला, ‘हां तो ढब्बूजी, आप केक कटा हुआ चाहेंगे या पूरा?’ ‘कटा हुआ। ढब्बूजी ने कहा। ‘कितने टुकड़े करूं, चार या आठ?’ ‘चार ही करो जी, आठ टुकड़े खाना जरा मुश्किल होता है!!’

  • एक अध्यापक ने गीता के द्वंद्व शब्द की व्याख्या समझाते हुए कहा—द्वंद्व, ऐसे जोड़े को कहते हैं, जिसमें हमेशा विरोध रहता है। जैसे सुख-दुख, सर्दी-गर्मी, और धूप-छांव आदि-आदि। अब तुममें से क्या कोई छात्र इसका उदाहरण दे सकता है? एक छात्र ने तपाक से बोला—जैसे पति-पत्नी।

  • मुन्ना स्कूल जा रहा था। ढब्बूजी ने देखा, उसने बस्ता भी उठा रखा है और सीढ़ी भी। उन्हें बड़ी हैरानी हुई। मुन्ने से पूछने लगे, ‘यह सीढ़ी लेकर किधर जा रहे हो, साहब?’ ‘पापाजी, मास्टरजी ने कहा है कि मैं इम्तिहान में पास हो गया हूं और आज से ऊपर की क्लास में बैठूंगा।’ मुन्ने ने जवाब दिया।

  • ढब्बूजी रसोई में बैठे थे। चूल्हे पर रखा दूध उबल-उबलकर बरतन से बाहर उफन रहा था। श्रीमती ढब्बूजी गुस्से में फनफनाती हुई रसोई में दाखिल हुईं और बोलीं, ‘क्या मैंने आपसे यह नहीं कहा था कि दूध उबलने के समय का खयाल रखना?’ ‘हां, कहा था! दूध ठीक बारह बजकर बारह मिनट पर उबला है।’ ढब्बूजी ने कलाई पर बंधी घड़ी दिखाते हुए कहा।
  • पति—अरे, सुनती हो, डॉक्टर का कहना है कि अधिक बोलने से उम्र काफी कम हो जाती है। पत्नी ने मुस्कुराकर कहा—अब तो तुमको विश्वास हो गया न कि मेरी उम्र पैंतालीस से घटकर पच्चीस कैसे हो गयी।

  • राह चलते एक व्यक्ति की पीठ पर जोर से धौल जमाते हुए ढब्बूजी बोले, ‘अरे चंदूलाल! कैसे हो?’ ‘उफ्! मैं...मैं...मैं...चंदूलाल नहीं हूं।’ वह व्यक्ति कराहकर पलटा और आंखें फाड़-फाड़कर देखते हुआ बोला, ‘अगर होता भी तो इतने जोर से कोई मारता है!’ ‘मैं चंदूलाल को कितने भी जोर से मारूं, तुमसे मतलब!’ ढब्बूजी बोले।



  • दो मंत्री हेलीकाप्टर में बैठे बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का दौरा कर रहे थे। पहला मंत्री बोला—यदि मैं यहां पचास रुपए का नोट फेंक दूं तो लोग कितने खुश होंगे? दूसरा मंत्री बोला—यदि मैं यहां सौ रुपए का नोट फेंक दूं तो लोग और भी खुश हो जाएंगे। उन दोनों की बेतुकी बातें सुनकर पायलट चुप न रह सका। वह झल्लाकर बोला—यदि मैं आप दोनों को उठाकर नीचे फेंक दूं तो लोग सबसे ज्यादा खुश होंगे।

  • एक बजाज की दुकान में आग लग गई। ढब्बूजी उसके मालिक से सांत्वना प्रकट करने गए। बोले, ‘आपकी साडि़यों की दुकान जल जाने से आपको काफी नुकसान हुआ होगा।’ ‘जी नहीं, सिर्फ आधा ही नुकसान हुआ।’ दुकानदार ने कहा। ‘वह कैसे?’ ‘सेल के कारण साडि़यों पर पचास प्रतिशत की छूट मिल रही थी।’

  • रात हो चुकी थी। श्रीमती ढब्बूजी बेलन लिये द्वार पर ही बैठी थीं। ढब्बूजी आए तो दहाड़कर बोलीं, ‘आज फिर देर से लौटे! कहां गए थे, महाशय?’ ‘देखो,’ ढब्बूजी ने संयत स्वर में कहा, ‘एक समझदार पत्नी अपने पति से कभी भी ऐसा सवाल नहीं करती।’ ‘और एक समझदार पति?’ श्रीमतीजी ने गुस्से में पूछा। ‘अब छोड़ो भी।’ ढब्बूजी बोले, ‘समझदार पति की तो पत्नी ही नहीं होती।’

  • मुल्ला नसरुद्दीन अपने डॉक्टर के पास आया और बोला: डॉक्टर, मेरी पत्नी तीन दिन से बिल्कुल चुप बैठी है, कुछ बोल नहीं रही। डॉक्टर बोला: मियां, आप मेरे पास क्यों आए। गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड वालों के पास जाओ। 

रोहन-तुमने मुझे धोखा दिया है।
दुकानदार-नहीं साहब मैंने आपको अच्छी क्वालिटी का रेडियो दिया है।
रोहन-इसपे लिखा है मेड इन जापान लेकिन चालू करो तो बोलता है ऑल इंडिया रेडियो।

2. मोहन की मां की तबियत खराब हो गई। वह अपनी मां को लेकर अस्पताल गया।
डॉक्टर ने कहा, "इनके कुछ टेस्ट होंगे।"
मोहन-हे भगवान, अब क्या होगा "मेरी मां तो अनपढ है।"

3. पति-क्यों न आज की चाय बाहर चलकर पी जाए।
पत्नी-क्यों? तुम्हें क्या लगता है कि मैं चाय बनाते-बनाते थक गई हूं?
पति-अरे नहीं, दरअसल मैं ही कप प्लेट धोते-धोते तंग आ गया हूं।

4. पत्नी (पति से)-मेरे पिताजी जब गाते थे तो उड़ते हुए पंछी गिर जाया करते थे।
पति (पत्नी से)-क्या तुम्हारे पिताजी मुंह में कारतूस भर कर गाते थे।

5. पत्नी (पति से)-इतनी देर हो गई, आखिर क्या ढूंढ रहे हो?
पति (पत्नी से)-कुछ भी नहीं।
पत्नी (पति से)-कुछ तो जरूर खोया है! चार घंटे से मैरिज सर्टिफिकेट को उलट-पलट रहे हो।
पति (पत्नी से)-देख रहा हूं कि इसकी एक्सपायरी डेट कहां है?

6. पप्पू-अपनी शादी वाले दिन बहुत उदास था!
राकेश-क्या बात है? आप उदास क्यों हो?
पप्पू-मेरे ससुराल वालों ने बारात में कम लोगो को लाने के लिये कहा है! पता नहीं मुझे लेकर जाएँगे भी या नहीं।

7. सुरेश-बारिश बहुत तेज है, तूफान भी चल रहा है! आप घर जाने का विचार छोड़ दीजिए यहीं सो जाइए!
राजेश-आप कहते हो तो मैं यहीं सो जाता हूँ पर मैं घर से अपना नाइट सूट तो ले आऊं।

8. चुन्नू-धरती और चाँद का क्या रिश्ता है?
मुन्नू-बहन और भाई का!
चुन्नू-वो कैसे?
मुन्नू-हम धरती को धरती माता कहते हैं और चाँद को चंदा मामा।

हास्य ध्यान
1.  घर में कलह होंने के बाद पति ने गुस्से में पंखे से रस्सी का फंदा लटकाया
और स्टूल पर चढ़कर रस्सी को गले में डालने के लिए तैयार हो गया।
पत्नी-जो, कुछ करना है जल्दी करो।
पति-तुम मुझे शांति से मरने भी नही दोगी।
पत्नी-मुझे अभी स्टूल की जरुरत है।

2. पति-पत्नी में झगड़ा हो रहा था।
पति- अब अगर तुमने एक शब्द भी और कहा तो मेरे अंदर का जानवर जाग  जायेगा!
पत्नी- ठीक है, ठीक है तुम्हारे अंदर जो जानवर बैठा है उसे जाग जाने दो भला  चूहे से भी कोई डरता है। !!! 

3. एक पागल आइना देखकर सोचने लगा इसको कहीं देखा है।
थोड़ी देर सोचने के बाद..
ओह तेरी ये तो वही है
जो मेरे साथ उस दिन बाल कटवा रहा था।

4. रमेश- मुझे अपनी पत्नी से दूसरी नजर में ही प्यार हो गया था।
मोहन- पहली नजर में क्यों नहीं?
रमेश- क्योंकि मेरी पहली नजर उसके हीरों के हार पर नहीं पड़ी थी।





5. संता के घर एक बिल्ली रहती थी जिससे वह बहुत परेशान था। एक दिन संता उससे तंग आकर कहीं छोड़कर आ गया पर संता के घर पहुंचने से पहले बिल्ली घर पहुंच गई।
संता दोबारा उसको बाहर छोड़कर आया पर वह फिर से घर पर वापस आ गई। संता को बहुत गुस्सा आ गया और इस बार उसने बिल्ली को बहुत दूर छोड़ दिया। फिर थोड़ी देर बाद अपनी बीवी को फोन किया और पूछा कि क्या बिल्ली घर आ गई है।
बीवी-हां, वह पहुंच गई है।
संता- उससे बोल मुझे आकर ले जाए, मैं रास्ता भूल गया हूं।

6. संता- ये नया मोबाइल कब लिया?
बंता-लिया नहीं.. गर्लफ्रेंड का उठाया है।
संता-क्यों?
बंता-वो रोज कहती है कि तुम मेरा फोन नही उठाते..
आज मौका देखकर उठा लिया।

7. एक बार इंडियन एयरवेज अपने जहाज को कलर करवाने का ठेका देना चाहती थी। तीन युवक सामने आये। एक ने कहा कि मैं इसे रंगने के 5 लाख रूपये लूंगा दूसरे ने कहा कि मैं इसे रंगने के 4 लाख रूपये लूंगा।
तब हमारे संता सिंह आए। उन्होंने जहाज को आगे पीछे से देखा और बोले मैं इसे रंगने के सिर्फ 5 सौ रूपये लूंगा।
तब एयरवेज के मैनेजर बोले कि तुम इतने कम में कैसे रंग करोगे। तब संता सिंह बोले ये दोनों तो बेवकूफ है जब हवाई जहाज आसमान में चला जाता है तब छोटा हो जाता है मैं सीढ़ी लगाकर कलर कर दूंगा।


"नृत्य में डूबो, उत्सव मनाओ, गीत गाओ-     यही धर्म है।"



"नृत्य में डूबो, उत्सव मनाओ, गीत गाओ-     यही धर्म है।"

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